Environment And Politics Are Deeply Fused
Environment aur politics dono fields ek – dusre se jude huye hain . Government policies directly environment ko effect krti hain .
Environment ka subject ‘ global Commons ‘ ke under aata hai jis pr sabhi ka equal right hai . Isliye protection ke liye bhi sabhi ka concern hona chahiye . 
 

Unauthorized Construction 

सरकार द्वारा ऐसे स्थानों पर इमारतों के निर्माण की स्वीकृति दे दी जाती है जो कि पर्यावरण के लिए हानिकारक होती हैं। उद्हारण के लिए सरकार द्वारा समुन्द्र के किनारे होटल बनाने कि इजाज़त दे दी जाती है जिसके कारण वहां के पानी के प्राकृतिक बहाव पर भी प्रभाव पहुँचता है। निर्माणकर्ताओं अपने अधिकारों का गलत प्रयोग करते हैं। 

Tussle Between Developed – Developing Countries

Environment protection के लिए समय-समय पर संधियां-समझौते किये जाते रहते हैं। जिसके भागिदार विकासशील-विकसित देश दोनों होते हैं।
परन्तु इस पर भी राजनीती होती रहती है कि जिसने ज़्यादा पर्यावरण को क्षति पहुंचाई है है वह इसका बोझ उठाये। विकासशील देशों द्वारा हमेशा से ही ये मत दिया जाता है कि जब तक वे विकसित देशों जितने विकसित नहीं हो जाते तब तक उनपर पर्यावरण को बचाने वाली नीतियों के प्रभाव न डाला जाए।
इसी मत के कारण बचाव कार्यों कि तरफ ध्यान ही नहीं दिया जाता।

Arms Race

Cold war के समय जो परमाणु हथियारों की होड़ चल रही थी वो वास्तविकता में अभी भी चल रही है। विकसित देशों की मानसिकता हमेशा से यही रही है कि विकासशील देशों को परमाणु विकास करने से रोकने के लिए उन पर रोक लगा दी जाए।

CTBT पर भारत द्वारा हस्ताक्षर इसी के कारण नहीं किये जा रहे क्योंकि भारत को लगता है कि ये उसकी परमाणु विकास कि गति को धीमा कर देगा। देशों द्वारा परमाणु परीक्षण किये जाते रहते हैं जो वायु व् ध्वनि प्रदूषण के बहुत बड़ा कारण है।

 

Everyone’s Duty Is No One’s Duty

Climate change ko control krne ke liye समझौते किये जाते हैं परन्तु कोई वास्तविकता में इस पर कोई कार्य नहीं कर रहा। क्योंकि हर एक देश यही सोचता है कि उसकी गतिविधियों से कितना फर्क पड़ेगा ? या मैं ही क्यों चिंतित रहूं ? , मेरी कोशिशों से क्या फर्क पड़ेगा ? इसी विचारधारा को सामने रख कर चलते हैं कि कोई दूसरा यह जिम्मेदारी उठाए।

Steps Taken By Government

उपरलिखित कुछ कारण हैं जिनके कारण राजनितिक क्रियाएं environment के लिए नुकसानदायक साबित होती हैं। परन्तु इसका मतलब ये नहीं कि पर्यावरण को बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जाते जा रहे हैं जो कि निम्नलिखित हैं :-

1 मोंट्रियल प्रोटोकॉल ओजोन परत को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए देशों द्वारा संधि की गयी।

2 Sustainable Development  करने के लिए एक सम्मेलन किया गया जो कि प्राकृतिक स्त्रोतों के प्रबंधन को वर्तमान मांगों की पूर्ति करने के साथ साथ भविष्य के लिए भी बचाए जा सकें।

3 1992 में Earth Summit किया गया जो कि रिओ डी जानेरिओ में हुआ। जिसका उद्देश्य पर्यावरण की सुरक्षा करना और सामाजिक-आर्थिक विकास करना था।

4 Carbon zfootprint को कम करने के लिए Paris Agreement 2015 , France में हुआ।

 

What To Do More ?

1 टिकाऊ विकास को वास्तविक व् प्रभावशाली रूप देने के लिए natural resources ki wastage ko rokna hoga .
 2 राष्ट्रों में चल रही राजनीती को छोड़ कर environment की सुरक्षा को मुख्य मुद्दा मान कर कार्य करने चाहिए। सम्मेलनों की नियमित बैठकें होती रहनी चाहिए ।
3 ऐसे फंड होने चाहिए जो कि केवल environment protection पर लगाए जाएं। जो राशि देशों की क्षमता के अनुसार जमा करवाने का प्रावधान होना चाहिए।
4 जो भी कानून , चाहे वे राष्ट्रीय स्तर पर या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बनते हैं , उन का नियमित परीक्षण होना चाहिए।5 Environment से समझौता करके किये जा रहे औद्योगिक विकास को रोकना चाहिए तथा बायोगैस , सूर्य की ऊर्जा , वायुशक्ति आदि के इस्तेमाल पर ज़ोर देना चाहिए।

Women Empowerment

Women empowerment se related social reformers ne apni voice bhi raise ki hai aur reforms bhi ki hain . Jiska zikr vedic period mein bhi hai aaj bhi itne reforms ke baawjood bhi ground reality ko bahut achhi nahi hai . 

Women During Vedic Period

वैदिक काल में women को शिक्षा का अधिकार होता था तथा महिलाओं द्वारा ग्रंथ भी लिखे गए।
इसके साथ ही हमारे लिए यह जानना भी आवश्यक है कि शिक्षा का अधिकार केवल उच्च वर्ग की महिलाओं तक ही सीमित था तथा केवल 1 % ग्रंथ ही उनके द्वारा लिखे गए हैं।
जितनी भी कुरीतियों के बारे हम जानते हैं उन सभी से लगभग उच्च वर्ग की महिलाएं ग्रस्त थी क्योंकि निम्न वर्ग की महिलाएं तो हमेशा से ही काम के लिए घर से बाहर जाती थी , उनकी शादियां भी उच्च वर्ग से कम खर्चीली होती थी।
समाज में एक आदर्श स्त्री को सीता के रूप में स्वीकार किया जाता था ना की काली और चंडी के रूप में।   

Patriarchical Nature Of Parliament

 Women Reservation Bill 1996 आज तक लोक सभा में पास नहीं किया गया ( जबकि 2010 में ये राज्य सभा द्वारा पास कर दिया गया था ) जो महिलाओं को लोक सभा और राज्य – विधानसभाओं में 33 % सीटें रिज़र्व रखने से संबंधित है।
विपक्षियों द्वारा इसे बेतुकी बातों के ज़रिये पास न करने के विलम्बित किया जा रहा है। 

Patriarchy in Indian Judiciary 

 

न्यायपालिका को भारत में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है जो की अपने निष्पक्ष स्वरूप के लिए जानी जाती है। परन्तु अगर सही मायनो में देखा जाए तो न्यायपालिका भी महिलाओं को लेकर प्रश्नों के घेरे में है। बहुत से केसों के नतीजे न्यायालयों द्वारा महिलाओं के हितों के विरुद्ध दिए गए हैं। 

उद्हारण :- शाहबानो एक मुस्लिम महिला थी , जिसे उसके पति द्वारा तलाक दे दिया गया। मुस्लिम धर्म के अनुसार ऐसे केस में पति 3 महीने तक खर्चा और शरीयत ( दहेज़ ) वापिस करेगा
परन्तु शाहबानो खुद को मुस्लिम महिला होने के साथ – साथ भारत की नागरिक होने के कारण CRPC की धारा – 125 के अंतर्गत भर का खर्चा मांग रही थी।
उस समय राजीव गाँधी की सरकार ने मुस्लिम समुदाय की वोट गंवाने के डर से अपना निर्णय मुस्लिम समुदाय के पुरुषों के हक में दे दिया। जो पहले ही न्यायपालिका को संविधान की धारा 26 ( बी ) के अनुसार इससे बाहर रहने की सलाह दे रहे थे।
2 इमराना भी एक muslim woman थी जिसका उसके ससुर द्वारा बलात्कार कर दिया गया था। जिसके पश्चात मुस्लिम धर्म के अनुसार उसका ससुर उसका पति और पति को उसका बेटा घोषित कर दिया गया। 
3 एक केस में न्यायपालिका के पितृसत्तात्मक स्वरूप के साथ – साथ जातिवादी मानसिकता देखने को मिली थी। भवानी देवी एक ग्राम सेविका थी। जिसका एक उच्चजाति से संबंधित पुरुष द्वारा बलात्कार कर दिया गया था। जिसके विरोध में केस जयपुर हाई कोर्ट में गया जिसका निर्णय यह कहकर पुरुष समुदाय के हक में दे दिया गया कि एक उच्चजाति से संबंध रखने वाला व्यक्ति lower caste women ka कर सकता। 

Irrational Religious Beliefs

 

मनु के कानूनों के अनुसार एक स्त्री चाहे वह किसी भी उम्र की हो कभी अपनी ज़िंदगी स्वतंत्र नहीं जी सकती उसे हमेशा पुरुष से स्वम् को निम्न रख कर रहना चाहिए।
जिस समय तक लड़की शादीशुदा नहीं है तब तक वह अपने पिता , उसके पश्चात अपने पति तथा पति की मौत के बाद अपने पुत्र के निम्न रहेगी। इस प्रकार मनु महिलाओं को किसी भी प्रकार की स्वतन्त्रता देने के खिलाफ है।
इस्लाम धर्म में तीन तलाक़ , बुरखा पहनने जैसी कुरीतियां महिलाओं के हितों के खिलाफ हैं।  वैदिक काल में केवल उच्च जाति की महिलाओं को ही पढ़ने और ग्रंथ लिखने की आज़ादी थी जिसके मुकाबले पुरुष लगभग सभी ग्रंथों के रचयिता थे।
ग्रंथों में लिखी हुई बातें भी एक पुरुष अपने नज़रिए से ही लिखेगा जिसका महिलाओं के लिए अन्यायपूर्ण सिद्ध होना स्वभाविक ही है। 

How Women Are Responsible For Their Subordinate Position ?

 

अगर कोई महिला ख़ास कर ग्रामीण इलाके से किसी भी चुनाव के लिए खड़ी होती है तो पुरुषों से पहले महिलाएं इस चीज़ का विरोध करना शुरू कर देती हैं , पहले ही उनके ना जितने की उम्मीद लगा कर बैठ जाती हैं।
इसके साथ ही महिलाएं अपना सारा दिन या यूँ कहें अपनी पूरी ज़िंदगी परिवार को खुश रखने में निकाल देती हैं जब उनसे पूछा जाता है कि वे अपने लिए वक्त कब निकालती हैं ? या खुद को खुश रखने के लिए क्या करती हैं ? , उस समय या तो उनके पास को जवाब नहीं होता या फिर उनकी खुश परिवार कि ख़ुशी के बाद आती है। जिसके फलस्वरूप परिवार का भी इन बातों की ओर कभी ध्यान नहीं जाता। 

Steps Taken To Empower Women 

 

राजा राम मोहन रॉय , महात्मा गाँधी , ईश्वर चंद्र विद्यासागर , मदर टेरेसा , विनोद भावे , बी आर अम्बेडकर , ज्योतिबा फुले , और विवेकानंद आदि द्वारा अथक परिश्रम किये गए। ब्रिटिश सरकार द्वारा महिला सुरक्षा के लिए Widow Remarriage Act 1856 , शादीशुदा महिला प्रॉपर्टी कानून 1874 , बल विवाह रोक के लिए 1921 में कानून पास किया गया , सती प्रथा पर रोक लगाई गयी।
इसके अलावा भारतीय संविधान में भी महिला सुरक्षा व् संरक्षण के लिए बहुत से अधिकार दिए गए हैं।1 धारा – 14 के अनुसार कानून के समक्ष प्रत्येक व्यक्ति समान है , धारा – 15 (1 ) के अंतर्गत भेदभाव की समाप्ति की गयी है , 15 ( 3 ) के अनुसार सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए विशेषाधिकार दे सकती है , धारा – 39 ( ऐ ) के अनुसार महिला – पुरुष दोनों को काम करने का समानाधिकार है , 39 ( डी ) के अनुसार समान वेतन देने का अधिकार महिला – पुरुष दोनों को दिया गया है।
2 धारा – 243 – डी के अनुसार पंचायती – चुनावों में एक – तिहाई सीटें women candidates के लिए reserve रखी जाएंगी। 243 -टी (3 ) में सभी नगरपालिकाओं में महिला सीट रिज़र्व रखी जाएँगी। इसी प्रकार धारा – 325 और 326 के अनुसार किसी भी व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के चुनाव लड़ने और वोट देने का अधिकार है।
3 इंदिरा गाँधी मातृत्व सहयोग योजना ( 2010 ) भारतीय सरकार द्वारा 19 साल से ऊपर उम्र की गर्भवती और दूध पिलाने वाली महिलाओं को उनके पहले दो बच्चों के जन्म के समय उनकी अच्छी सेहत और पौष्टिक स्तर की सुरक्षा के लिए चलाई गयी है।
4 राष्ट्रीय महिला कोष 1993 के अंतर्गत उन महिलाओं के लिए सस्ते दरों पर लोन देने की सुविधा दी गयी है जो पैसे की कमी के बावजूद अपना कोई छोटा कारोबार शुरू करना चाहती हैं।5 डिजिटल इंडिया इनिशिएटिव के अंतर्गत Mahila – A Haat प्रोग्राम चलाया गया जिसमें महिलाएं अपने द्वारा निर्मित वस्तुओं को गैर सरकारी संस्थाओं के ज़रिये लोगों तक पहुंचा सकें। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को भ्रूण हत्या की रोकथाम के लिए शुरू किया गया।

6 ” सखी ” एक फण्ड स्कीम है जिसका नाम ” निर्भया फण्ड ” है जो 1 अप्रैल 2015 में शुरू किया गया। जो महिलाओं के साथ हो रही घटनाओं की रोकथाम के लिए पुलिस की 24 घंटे सहायता , FIR दर्ज करवाने और कॉउन्सिलिंग देने और मुफ्त मेडिकल सहायता देने के लिए रहे हैं इनके द्वारा ” 181 ” टोल – फ्री नंबर भी शुरू किया गया है।

 

Solutions

1 रेप अपराधियों के लिए कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए तांकि इसके बारे में कोई सोच भी न पा सके। आए दिन पुलिस की हिरासत में भी रेप होते हैं जिसका कारण कमज़ोर और लाचार कानून – व्यवस्था है।
2 दाज – व्यवस्था आज भी पुरज़ोर तरीके से चल रही है जिसके कारण ही बेटियां पैदा करने से कई लोग डरते हैं लिहाज़ा उन्हें जन्म से पहले ही मौत की भेंट चढ़ा दिया जाता है। सरकारों को इसकी रोकथाम के लिए भी कानून बनाने चाहिए।
3 महिलाओं को खुद की इच्छाओं – उम्मीदों को जीवित रखना चाहिए , ऐसा स्वभाव ना रखें कि आपका परिवार आपकी खुशियों की ओर ध्यान देना ही भूल जाए। घर के कामों में परिवार के अन्य मेंबरों की मदद ले कर आप खुद के लिए समय निकाल सकती हैं , खुद के बारे में सोच सकती हैं।
4 Women Reservation Bill को पास करवाने के लिए सभी महिला सांसदों को पार्टी – भेद को एक तरफा रख कर उसे पास करवाने के लिए आवाज़ उठानी चाहिए।
5 Women को उनके अधिकारों के प्रति जागृत करने के लिए सरकार को सेमीनार लगवाने चाहिए या इसके अलावा अपने आस – पास रहने वाली women का हम खुद भी बातचीत के ज़रिये मार्गदर्शन कर सकते हैं। जो अक्सर होता भी है , सकारात्मकता ये है कि पुरुष भी इसमें भागीदारी डालकर मिसाल कायम कर रहे हैं।6 सभी कार्य – स्थलों पर Women cells की सुविधा होनी चाहिए जो पूर्ण रूप से क्रियाशील हों। 

7 किसी भी काम ke prti gendered view nhi rkhna चाहिए अर्थात किसी भी काम के बारे में ये नहीं सोचना चाहिए की ये पुरुषों का है या केवल महिलाओं से संबंधित है। जैसा हमने देखा ही है घर के कामों जैसे खाना बनाना , परिवार संभालने जैसे कामों को महिलाओं और बाहर के कामों को पुरुषों से जोड़ कर देखा जाता है।

Political Socialization

 

Political Socialization

Political Socialization ki process se political cuture ko ek generation se dusri generation tk transfer kiya jata hai .
Yeh ek universal aur uncontrollable process hai .
Sabhi societies ko apni authoritative position ko bnaaye rkhne ke liye is process ko aage bdhaate rehna important hai . 

Aspects Of Political Socialization

समाजीकरण के पहलुओं है कि :- 1 लोग क्या सीखते हैं ? ( Subject )
2 कब सीखते हैं ? ( Time and sequence )

3 किससे सीखते हैं ? ( Factors )
 

Agents of Political Socialization

राजनीतिक समाजीकरण के बहुत से कारकों का हाथ होता है। औपचारिक शिक्षा के अलावा परिवार , साथियों का समूह , कार्यस्थल , मीडिया और चिन्ह आदि राजनीतिक संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए अत्यावश्यक भूमिका निभाते हैं। जिनपर संक्षेप चर्चा निम्नलिखित है :-
1 Family 
परिवार समाजीकरण का सर्वप्रथम कारक है यह एक बच्चे की राजनीतिक जागरूकता में सहायक है। इसी स्तर पर बच्चा सबसे अधिक सीखता है क्योंकि इस समय बच्चा परिवार की अलावा अन्य सभी कारकों से परिचित नहीं हुआ होता , नतीजन परिवार की मूल्यों का प्रभाव स्वभाविक है।
2 Peer group यह हमउम्र लोगों का समूह होता है जिनकी समस्याएं लगभग समान होती हैं , राजनीति को यह समूह सबसे अधिक प्रभावित कर रहा है।

3 School 

परिवार के पश्चात बच्चा स्कूल की ज़रिये अलग – अलग तरह के राजनैतिक पहलुओं से वाकिफ होता है। जहां मित्र और अध्यापक दोनों जानकारी का स्त्रोत बनते हैं।

4 Workplace 

राजनैतिक समाजीकरण में कार्यस्थल भी आवश्यक है क्योंकि यहीं लोग प्रदर्शन और निर्णय – निर्माण आदि में भागीदारी सीखता है जोकि राजनीति को प्रभावित करती है।

5 Symbols 

चिन्ह राजनैतिक समाजीकरण में सहायक है। स्वतन्त्रता सैनानियों के जन्मदिवस और शहीदी दिवस लोगों में उत्शाह भरने का कार्य करता है। जो युवाओं को देश के प्रति समर्पण के लिए प्रेरित करता रहता है।

6 Media

समकालीन समय में मीडिया राजनैतिक जानकारी प्रदान करवाने वाला महत्वपूर्ण कारक बन गया है। लोग आजकल अपना ज़्यादा समय स्कूल , कॉलेजों और कार्यस्थलों आदि के मुकाबले मीडिया पर अधिक गुज़ारते हैं।

 

Phases Of Political Socialization

समाजीकरण के लिए उपरलिखित कारक उत्तरदायी हैं। अब हम चर्चा करेंगे कि किन पड़ावों पर ये कारक हमें प्रभावित करते हैं ? इन पड़ावों को हम दो भागों में बाँट कर समझेंगे :-
1 Childhood 
इस पड़ाव के दौरान बच्चे में राजनीतिक वफादारी / विश्वास पनपना शुरू होता है। यह पड़ाव आवश्यक है क्योंकि यही जानकारी आगे चलकर राजनीति को समझने के लिए चेतना पैदा करती है , तथा परिवार ही इस समय मुख्य संस्था होती है जहां से बच्चा ज्ञान की प्राप्ति करता है। इसके पश्चात जैसे – जैसे बच्चा बड़ा होता है वह नई – नई संस्थाओं से जुड़ता जाता है , कारक प्रभावित करते रहते हैं , ज्ञान में बढ़ौतरी होती रहती है।
2 Adulthood इस अवस्था में बच्चा संकल्पनात्मक समझ में बढ़ावा करता है। बचपन में हुआ समाजीकरण उसे किशोरावस्था में राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने में मदद करता है। इस पड़ाव में चाहे किशोर जितनी मर्ज़ी अपनी जानकारी को संशोधित करले परन्तु वह बचपन में प्राप्त की गई जानकारी से किनारा नहीं कर पाता।
इन दो पड़ावों में एक बच्चे का समाजीकरण होता है जिसकी प्राथमिक अवस्था में राजनीति के प्रति चेतना आती है तथा उसके साथ ही व्यक्ति को किशोरावस्था में आने पर राजनीतिक क्षेत्र के लिए त्यार किया जाता है।

 

 

Characteristics Of Political Socialization 

1 समाजीकरण की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है।2 यह एक सार्वभौमिक प्रक्रिया है।3 यह अनयंत्रित होती है।4 यह प्रक्रिया औपचारिक और अनौपचारिक दोनों होती है।5 समाजीकरण के ज़रिये राजनैतिक संस्कृति एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जाती है।

 

Significance Of Political Socialization 

यह प्रक्रिया :-1 शासन को स्थिरता प्रदान करने में सहायक है।
2 लोगों को राजनीतिक सहभागिता के लिए त्यार करने में महत्वपूर्ण है।
3 राजनैतिक संस्कृति को बनाये रखती है।4 राजनैतिक चेतना प्रदान करती है।

5 राजनीतिक शासन को औचित्य प्रदान करती है।

 

Conclusion 

उपरलिखित चर्चा के पश्चात हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि समाजीकरण की प्रक्रिया राजनीति को मज़बूती प्रदान करने के काम करती है। आलमंड और पॉवेल के अनुसार ” राजनैतिक समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके ज़रिये राजनैतिक संस्कृति को बनाये रखा और उसमें बदलाव किया जाता है। ”
ये प्रक्रिया औपचारिक अर्थात स्कूल , कॉलेजों व संस्थानों के साथ – साथ अनौपचारिक ढंग जैसे परिवार , साथी – समूहों आदि के ज़रिये आगे बढ़ाया जाता है। यह प्रक्रिया वैसे तो सार्वभौमिक होती है परन्तु प्रत्येक स्थान पर इसकी प्रकृति अलग – अलग होती है।

 

CAA , CAB , NRC

CAA , CAB तथा NRC 

 

लोगों में CAA , CAB या NRC में रोष का कारण कहीं मोदी – अमित में चल रही खींचातानी तो नहीं ?
Full form of CAA , CAB और NRC :- 
1 Citizenship Amendment Act ( नागरिकता संशोधन कानून )
2 Citizenship Amendment Bill ( नागरिकता संशोधन बिल )
3 National Register Of Citizens ( राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर )
 

1 CAA :-नागरिकता संशोधन कानून के अनुसार हिन्दू , पारसी , बुद्ध , जैन , पादरी तथा सिख जो पाकिस्तान , बांग्लादेश और अफगानिस्तान से बिना वीज़ा के 31 दिसंबर , 2014 से पहले भारत की हद में दाखिल हुए हैं और पांच पांच साल से यही ठहरे हुए हैं , वे सभी भारत की नागरिकता के लिए आवेदन दे सकते हैं। कानून – निर्माताओं के अनुसार मुसलमान इस श्रेणी से बाहर रखे गए हैं क्योंकि उपरलिखित तीन देश मुस्लिम बहुसंख्यक हैं इसलिए अन्य धर्मों के लोग इन देशों में भेदभाव और कष्ट झेलते हैं।
2 CAB :-नागरिकता संशोधन बिल दोनों सदनों में पास होने के पश्चात राष्ट्रपति की मंज़ूरी के लिए भेजा गया ( एक बिल , कानून तब ही बनेगा जब उसे राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिलेगी) इस बिल पर राष्ट्रपति की मंज़ूरी के साथ ही कानून में तब्दील हो गया।
3 NRC :-राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर एक रजिस्ट्री है जिसमें असम के लोगों के नाम तथा कुछ जानकारी को सम्मिलित किया गया था , तथा इस सूची से गैरकानूनी ढंग से आए लोगों को बाहर किया गया है। पहले यह केवल असम राज्य के लिए बनाया गया था परन्तु 20 नवंबर , 2019 को ग्रहमंत्री अमितशाह द्वारा पूरे देश में लागू करने का ऐलान कर दिया गया। 

Difference between CAA and NRC

 

NRC का आधार धर्म न होकर घुसपैठ है कोई भी व्यक्ति जो भारत की सरहद में गैरकानूनी ढंग से रह रहा है उन्हें बाहर किया जाएगा , जबकि CAA का आधार मुस्लिम धर्म है। जो भी लोग बांग्लादेश , पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भारत में दाखिल हुए हैं उन्हें देश से बाहर किया जाएगा।( ग्रह मंत्री के अनुसार)

Are they anti – muslim ?

 

 

अमित शाह द्वारा अपने भाषणों में साफ़ – साफ़ इस बात को स्पष्ट किया है कि वे 2024 तक भारत से मुस्लिम घुसपैठियों को बाहर करेंगे। तो वहीं दूसरी ओर मोदी ने कहा है कि उन्होनें अपने अब तक के कार्यकाल में लगभग 600 मुसलमान शरणार्थियों ( पड़ोसी देशों के ) को नागरिकता प्रदान की है। इसी कारणदेश में रह रहे मुस्लिम आवाम में रोष बढ़ रहा है , क्योंकि शाह ने मुस्लिम धर्म के अलावा अन्य 6 धर्मों का बकायदा नाम लेकर नागरिकता प्रदान करने की बात कही है। 

Modi vs Shah ?

 

 

1 मोदी – शाह इस मुद्दे पर एकमत नज़र नहीं आ रहे क्योंकि NRC पर शाह ने राजयसभा में अपने भाषण में
इस बात को पूर्णतया स्पष्ट कर दिया है कि इसे संपूर्ण भारत में लागू किया जायेगा तथा बीजेपी के एजेंडे में भी
इस का उल्लेखन है।

2 जबकि मोदी ने एक रैली के दौरान रामलीला मैदान में दिए अपने भाषण में कहा कि 2014 से लेकर आजतक
कभी NRC का ज़िक्र नहीं हुआ ना ही देश में कोई नए हिरासत केंद्र यानी डिटेंशन सेंटर नहीं बनाये गए।

3 इसके विपरीत कर्नाटक में एक नया डिटेंशन सेंटर बनाया गया है जिसे अमित शाह के अनुसार जल्दी ही शुरू
कर दिया जाएगा।

 

 

आवाम के विरोध के बावजूद सरकार इस पर क्यों डटी है ?

 

1 बीजेपी अपने एजेंडे के अनुसार देश को हिंदुत्व राष्ट्र में बदलना चाहती है। जो देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को
खत्म कर रही है क्योंकि ऐसे राष्ट्र में सभी धर्मों का सम्मान बराबर का होना चाहिए।
2 इस प्रक्रिया में बहुत सी राशी बर्बाद की जायेगी जिसे सरकार चाहे तो आर्थिक विकास के लिए उपयोग कर सकती है , परन्तु ऐसा सरकार लोगों का ध्यान इस मुद्दे से हटाने के लिए ही तो कर रही है।
3 जम्मू – कश्मीर में सरकार द्वारा पिछले कई दिनों से इंटरनेट सेवाएं ठप्प की हुई है , जिस के संबंध में कोई
कार्यवाही नहीं की गई।
असल में लोगों का ध्यान भटकाना ही सरकार का उद्देश्य है।सत्ताधारी सरकार खोखले मुद्दों पर राजनीति के ज़रिए लोगों का ध्यान भटकाने की चाह रखती है। परन्तु ऐसा करते समय वह शायद ये भूल जाती है कि जैसे कटटर हिंदूवादी नेता संसद में बैठ कर गौहत्या जैसे फ़ालतू मुद्दों पर राजनीति कर देश के हालात बद से बदतर कर रहे हैं उसकी वजह से पढ़े लिखे युवा बेरोज़गारी , किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो चुके हैं।
देश की जीडीपी 4 दशमलव 5 % की दर से चल रही है इसकी तुलना चीन की जीडीपी से की जा रही है क्योंकि 2003 में चीन का आर्थिक विकास इतना धीमा था। इससे हमें ये तो अंदाजा लगा ही लेना चाहिए कि जिस देश से मोदी सरकार मुकाबला करने के दावे करती है वे पूर्णतया निरर्थक और खोखले हैं।

Democratic Dictatorship ( 2020 )

Dictatorship In The Name Democracy ?

Democratic government ki power ka source aam janta hoti hai . Isliye representatives ka objective unke interests ko fulfill krna hota hai .  Absolute majority se aayi govt ki policies ka nature democratic na hokr dictatorship wala ho gya prteet hota hai . 

Nature Of Dictatorship 

1 तानाशाह अपनी शक्ति को मतभेदों से ऊपर रखता है।
2 सरकार के सभी भागों पर नियंत्रण
3 सरकार का मीडिया पर नियंत्रण
4 लोगों पर नियंत्रण बनाये रखने के लिए मर्डर , कैद , हिंसा , धमकी तथा मानवाधिकारों का उलंघन
5 व्यक्तित्व पंथ ( personality cult ) को दैवीय स्वरूप प्रदान करना।

Limited Nature Of Media 

भले ही प्रधानमंत्री ” मन की बात ” के ज़रिए लोगों से रूबरू होते है परन्तु इसका क्या लाभ यदि जनता की आवाज़ को ना सुना जाए। आज मीडिया का स्वरूप संकुचित होता जा रहा है , ज़्यादातर न्यूज़ चैनलों पर धर्म के नाम पर राजनीति , अतार्किक मुद्दों पर बहस कर लोगों का ध्यान भटकाने का काम कर रही है। आये दिन पत्रकारों से जुडी हिंसा की खबरें सुनने में आती रहती हैं उदहारण ;- गौरी लंकेश। 

Removal Of Article 370 Unconstitutional 

धारा – 370 का खात्मा करने के पीछे सरकार का उद्देश्य जम्मू और कश्मीर को प्रमाणिक ढंग से भारत का अभिन्न अंग बनाया गया। जिससे कि अब इस क्षेत्र से अन्य राज्यों का सम्पर्क बढ़ेगा तथा विकास की गतिविधियां तेज़ होंगी। परन्तु इसके आलोचकों का मत है कि जिस ढंग से धारा – 370 का खात्मा किया गया वह गलत है , क्योंकि इस प्रक्रिया के समय महबूबा मुफ़्ती समेत कई कश्मीरी राजनेताओं को हिरासत में ले लिया गया , इसके साथ ही संचारव्यवस्था को ठप्प कर दिया गया।

Anti – Government = ” Anti – National “

हमारे देश का माहौल इतना खराब हो चुका है कि सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले लोगों को सरकार ” देशद्रोही ” घोषित करने में बिलकुल समय नहीं लगाती। फिर चाहे वह संसद में बैठा विरोधी पक्ष हो या शिक्षा संस्था का कोई विद्यार्थी।

 

 

Hit On The Spirit Of Constitution 

संविधान की भावना ( spirit of the constitution ) का सीधा सा संबंध लोगों की भावनाओं की ओर इशारा करता है। परन्तु सरकार द्वारा CAA     ( 2019 ) , NRC जैसी नीतियां संविधान की विरोधी हैं। भले ही बीजेपी नेता बार बार इन्हें नागरिकता लेने वाला नहीं नागरिकता देने वाला बताती हैं , फिर भी ऐसे कानूनों की देश को फिलहाल कोई ज़रूरत नहीं थी। सरकार क्यों इस बात को नहीं समझती कि हमें डूबती अर्थव्यवस्था से संबंधित कानूनों की ज़रूरत है , नाकि धर्म के नाम पर की जा रही राजनीति की।

 

 

Homogenizing Diversity 

कुछ समय पहले सत्ताधारी सरकार द्वारा देश में हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बनाये जाने की बात कही थी। जिस देश को अपनी विविधता पर गर्व है उसी विविधता पर हमला सरकार कर रही है। ऐसे कानूनों ने अल्पसंख्यकों में असुरक्षा ही प्रदान की है इसका देश के विकास में कोई योगदान नहीं होगा।

From Democracy To Tyranny 

Tyranny अर्थ जब सत्ता कुछेक व्यक्तियों के हाथ में हो 

मोदी सरकार भले ही पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई है परन्तु इनके द्वारा शक्ति के केन्द्रीकरण की कोशिश की जाती रहती है। अर्थात संसद में बीजेपी का डंका बजाते रहते हैं , तो वही दूसरी ओर देश में हिंदुत्व का शोर मचाते फिरते हैं। जिसका सीधा सा अर्थ यही है कि इनके द्वारा संसद में किसी विरोधी दल को तथा देश में किसी अन्य धर्म को स्वीकार नहीं करते।

 

‘ Democratic Dictatorship ‘ – Shashi Tharoor 

 

पिछले साल दूसरी बार मोदी सरकार के 100  Days  पूरे होने पर शशी थरूर द्वारा सरकार की बुरी कार्यशीलता की आलोचना करने के लिए Democratic Dictatorship की संज्ञा प्रयोग की गई। उनके अनुसार सरकार के कार्यों की स्थिति इतनी बुरी होने के कारण मोदी के नाम की मशहूरी बनी हुई है। सरकार द्वारा आर्थिक मुद्दों के अलावा धार्मिक मुद्दों पर राजनीति , धारा – 370 को हटाने के लिए असंवैधानिक हथकंडों का इस्तेमाल कर नागरिकों को तंग किया जाता रहता है।

Economy Revival Measures
PM Modi Indian economy को 2024 तक 5 trillion  economy बनाने का सपना लोगों को दिखाया था।
Economic revival ke liye govt . ne demonitisation , GST , agriculture तथा labour related changes किये। prntu इन बदलावों से देश की economy को कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ा।
देश की Economic recession का मुख्य कारण बन रही नीतियों का sustainable  ना होना है। 

Reasons For Economic Recession 2020 ?

 

1 कर- आय में समस्या :- देश की GDP के मुकाबले टैक्स का संग्रहण कम है
2 खपत में गिरावट
3 नोटबंदी
4 GST के लागू करने संबंधी समस्या
5 रोज़गार दर में गिरावट
6 अनौपचारिक क्षेत्र ( उदहारण :- दिहाड़ी करने वाले ) से संबंधित सुधारों में कमी
7 व्यापारिक टैक्स दर अन्य देशों के मुकाबले बहुत ज़्यादा 

Measures By Dr. Manmohan Singh Economic Revival

 

 

1 देश के पूर्व प्रधानमंत्री GST तथा demonitisation  दोनों को ही flawed  मानते हैं क्योंकि उनका मानना है कि दोनों नीतियों को सरकार द्वारा गलत समय पर लागू किया गया है। जिसके लिए GST को पुनर्गठित करना ज़रूरी है।
2 देश में घटी consumption को दोबारा से बढ़ाने के लिए नए रास्ते ढूंढने होंगे।
3 Automobile और real estate क्षेत्र घाटे के दौर से गुज़र रहा है। क्योंकि इस क्षेत्र से अब तक लगभग तीन लाख मज़दूर अपना रोज़गार गवा चुके हैं , इसलिए जल्दी से जल्दी इसका समाधान ढूँढना होगा।
4 Liquidity Boost की देश को बहुत ज़रूरत है। Cottage industries economy को मज़बूती प्रदान करते हैं तथा नोटबंदी के पश्चात बैंकों द्वारा इन उद्योगों की जमा रकम को रोक दिया गया।
5 अमेरिका और चीन के मध्य चल रहा trade war भारत के निजी निवेश में बढ़ावा कर सकता है।
6 नई तकनीकों का प्रयोग वितरणात्मक उत्पादन तथा विकेन्द्रीकृत विभाजन के लिए किया जाना चाहिए। 

Measures By Former RBI Governor Raghu Ram Rajan

 

 

1 सरकार द्वारा फण्ड का आदान – प्रदान केंद्र से राज्यों तथा राज्यों से स्थानीय क्षेत्रों तक होना चाहिए तांकि सरकार की जवाबदेही में बढ़ावा हो।
2 भूमि , लेबर और वित्तीय सुधार आने से अनौपचारिक क्षेत्र में सुधार आएगा। रघुराम राजन द्वारा यह भी सुझाव दिया गया कि इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को कॉन्ट्रैक्ट के ज़रिए काम पर रखना चाहिए इसके साथ ही ओवरटाइम दें तांकि उनके काम को सुरक्षा प्रदान की जा सके।
3 देश के लगभग 70 % बैंकों पर सरकार का कण्ट्रोल है जोकि नकारात्मक है। सरकार को आर्थिक क्षेत्र से सार्वजनिक क्षेत्र की मौजूदगी को घटा कर निजी क्षेत्र को इसका स्थान देना चाहिए।
4 विदेशी मुद्रा निवेश में बढ़ावे के लिए  tariffs  को घटना होगा।
5 ग्रामीण इलाकों में सड़कों , यातायात के साधनों का विकास हो तांकि लोगों को रोज़गार मिले तथा संयोजकता बढ़े।
6 Economic revival ke liye सरकार को अपनी नीतियों को decentralise करने की ज़रूरत है।
7 भारत निशुल्क व्यापार समझौतों का भागीदार बने जो देश की प्रतियोगिता तथा घरेलू समर्था को बढ़ाए। 

PERSONAL VIEWS :-

 

1 हमारे देश में आई आर्थिक मंदी से निपटने के लिए ना केवल उत्पादन बढ़ाने की ज़रूरत है ना ही खपत की। बल्कि हमें ऐसी आर्थिक नीतियों की ज़रूरत जो संतुलित हो।
2 अगर खपत बढ़ानी है तो रोज़गार बढ़ाना होगा तांकि लोग उस योग्य हो सकें कि खरीद सकें। जितनी खपत बढ़ेगी उतने ही अधिक उत्पादन की मांग में बढ़ावा होगा।
3 आर्थिक नीतियों का स्वरूप संयुक्त होना चाहिए। अर्थात नीतियां ना केवल गरीबों – अमीरों , पुरुष – महिलाओं , श्रमिकों – उद्योगपतियों व् ग्रामीण – शहरों के हक में हों , बल्कि ये सभी को साथ लेकर चलने वाली होनी चाहिए क्योंकि देश को आर्थिक पक्ष से मज़बूती प्रदान करने के लिए सब को सक्षमता प्रदान करनी ज़रूरी है।
4 पूर्व RBI चीफ रघुराम राजन द्वारा महिलाओं की आर्थिक क्षेत्र से घटती मौजूदगी को लेकर चिंता व्यक्त की गई। उनके अनुसार महिलाओं की संख्या पहले 35 % थी जो अब घट कर 27 % रह गई है। जो भी सरकार के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।
5 देश में से महंगे ईंधन की खपत को घटाने के लिए मुफ्त ऊर्जा जैसे – वायु , सौर्य ऊर्जा तथा गोबरगैस आदि में पूँजी निवेश करना चाहिए और यह किया भी जा रहा है। 
6 इसके साथ ही विदेशी मुद्रा निवेश को बढ़ावा देने के साथ – साथ indigenous capitalism  ( ex. Khadi Products ) को प्रोत्साहित करना होगा  देश में बनी वस्तुओं में निपुणता लाने की आवश्यकता है , इसके साथ ही युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे।